ग्रंथसार
क्या कभी किसी पक्षी के लिए स्वयं भगवान की आँखों से ऐसे आँसू बहे जैसे किसी अपने प्रियजन के लिए बहते हों?
रामायण की अनसुनी कथाएँ · पाठ 19
जब श्रीराम जटायु के लिए रो पड़े