ग्रंथसार
बीमारी से घिरे भीमाजी जब शिरडी पहुँचे, तो उनके पास अपनी पीड़ा कहने और सहारा माँगने के सिवा बहुत कम बचा था।
श्री साईं बाबा — कथाएँ, लीलाएँ और अनुभव · पाठ 18
भीमाजी की कठिन रातें