ग्रंथसार
ब्रह्मज्ञान माँगने आए एक संपन्न व्यक्ति के सामने श्री साईं बाबा ने पाँच रुपये की ऐसी बात रखी कि उसे अपनी ही पकड़ दिखाई देने लगी।
श्री साईं बाबा — कथाएँ, लीलाएँ और अनुभव · पाठ 21
ब्रह्मज्ञान और पाँच रुपये