ग्रंथसार
गाँव वाले जिस ऊँची आवाज़ को अपनी नींद में बाधा मान रहे थे, श्री साईं बाबा उसी में एक साधक के भीतर चल रहे संघर्ष को देख रहे थे।
श्री साईं बाबा — कथाएँ, लीलाएँ और अनुभव · पाठ 3
रोहिल्ले की ऊँची पुकार