ग्रंथसार
श्री साईं बाबा ने चार आम दामू अण्णा के लिए अलग रखे थे, जबकि उनके मन की सबसे पुरानी चिंता किसी फल की नहीं, संतान की थी।
श्री साईं बाबा — कथाएँ, लीलाएँ और अनुभव · पाठ 31
चार आमों की आशा