ग्रंथसार
जब गोपाल नारायण अंबाडेकर जीवन से हार मानने लगे, तभी समय पर मिली एक पुस्तक ने उनके निर्णय को बदल दिया।
श्री साईं बाबा — कथाएँ, लीलाएँ और अनुभव · पाठ 33
अंबाडेकर को मिला सहारा