ग्रंथसार
जिस पुस्तक को लेने में शामा संकोच कर रहे थे, उसी को लेकर उठे विवाद में साईं महाराज ने पाठ और प्रेम का अंतर समझाया।
श्री साईं बाबा — कथाएँ, लीलाएँ और अनुभव · पाठ 34
शामा को सहस्रनाम