ग्रंथसार
चावड़ी की उस शोभायात्रा में भजन और फूलों के साथ कितने हाथ चुपचाप सेवा में लगे रहते थे, यह बात उसके पूरे क्रम को देखने पर खुलती है।
श्री साईं बाबा — कथाएँ, लीलाएँ और अनुभव · पाठ 45
चावड़ी की पावन रात