ग्रंथसार
शिरडी के एक मेले में रामजन्म का कीर्तन और मुसलमानों का चंदन-जुलूस साथ कैसे आए, बिना किसी को अपनी आस्था छोड़े?
श्री साईं बाबा — कथाएँ, लीलाएँ और अनुभव · पाठ 9
एक उत्सव, अनेक आस्थाएँ