ग्रंथसार
नमिषारण्य के पावन तट पर ज्ञान की गंगा बह रही है, जहाँ आज सूतजी कुरुवंश के उस कठिन कालखंड का रहस्योद्घाटन कर रहे हैं।
आदिपर्व · अध्याय 106
महर्षि व्यास का आगमन