ग्रंथसार
जीवन के प्रति मोह और प्रतिशोध की अग्नि के बीच झुलसता मानव मन जब सत्य को खोजता है, तभी उसके अंतःकरण में ज्ञान का उदय होता है।
आदिपर्व · अध्याय 12
प्रमद्वरा का पुनर्जीवन और रुरु की सर्प-प्रतिहिंसा