ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्ज्वलित हुए, तो सूतजी ने पाण्डवों के जन्म की उस अद्भुत कड़ी को सुलझाना आरंभ किया जो अभी तक देवरात के मन में अधूरी थी।
आदिपर्व · अध्याय 125
माद्री की सन्तान-कामना तथा नकुल और सहदेव का जन्म