ग्रंथसार
मृत्यु का समय जब निकट आता है, तब बुद्धि भी उसी के अनुरूप विपरीत होने लगती है, यही काल का चक्र है।
आदिपर्व · अध्याय 126
वसन्त ऋतु में पाण्डु का काम-मोहित होना और देहत्याग