ग्रंथसार
गुरु की आज्ञा केवल शब्द नहीं, बल्कि शिष्य के शौर्य और विवेक की कसौटी होती है।
आदिपर्व · अध्याय 127
ग्राह-मोक्ष और ब्रह्मशिर अस्त्र की प्राप्ति