ग्रंथसार
क्या आप जानते हैं कि अर्जुन की श्रेष्ठता केवल उनके धनुष के कौशल में नहीं, बल्कि उनके भीतर छिपे उस अद्भुत विवेक और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता में थी, जिसने उन्हें गुरु द्रोण का सबसे प्रिय शिष्य बना दिया?
आदिपर्व · अध्याय 133
अर्जुन की निष्ठा और ग्राह-परीक्षण