ग्रंथसार
क्या एक अकेला व्यक्ति अपने पूर्वजों के ऋण और उनके भविष्य का भार अपने कंधों पर लेकर चल सकता है, आइए जानते हैं महर्षि जरत्कारु की इस मार्मिक कथा में।
आदिपर्व · अध्याय 14
जरत्कारु द्वारा अपने अधोमुख लटके पितरों का दर्शन