ग्रंथसार
हिडिम्बा के प्रेम और धर्मराज युधिष्ठिर के न्याय के संगम से उपजी वह कथा, जो आज भी मानवता की मर्यादाओं को परिभाषित करती है।
आदिपर्व · अध्याय 155
हिडिम्बा का निवेदन और विवाह-स्वीकृति