ग्रंथसार
आश्रम के शांत वातावरण में जब सत्य और त्याग की चर्चा छिड़ी, तो गुरुवर सूतजी ने उस बालिका के आत्मबलिदान की गाथा सुनाई, जिसने काल के कपाल पर अपनी ममता की अमिट छाप छोड़ी थी।
आदिपर्व · अध्याय 159
कन्या का आत्मबलिदान