ग्रंथसार
गुरुदेव, जब धर्मसंकट के बादल अपनों पर ही छा जाएं, तो एक निडर हृदय किस प्रकार न्याय का मार्ग चुनता है?
आदिपर्व · अध्याय 161
कुन्ती का आश्वासन