ग्रंथसार
मृत्यु के मुख में खड़े होकर भी वसिष्ठ ऋषि का अस्तित्व शेष क्यों रहा, आइए आज हम इस रहस्य को उनके जीवन के सबसे कठिन अध्याय के माध्यम से समझते हैं।
आदिपर्व · अध्याय 173
वसिष्ठ का अपार शोक और गर्भस्थ पराशर की ध्वनि