ग्रंथसार
क्या आप जानते हैं कि एक ऋषि का करुणा-भाव न केवल शत्रु को क्षमा कर सकता है, बल्कि एक पूरे वंश के विनाश को भी रोक सकता है?
आदिपर्व · अध्याय 177
राजा कल्माषपाद की वंश-वृद्धि