ग्रंथसार
गुरुदेव, क्रोध की अग्नि में जलते हुए तपस्वी का हृदय भला कैसे शांत हो सकता है?
आदिपर्व · अध्याय 178
पराशर का क्रोध और और्व-उपाख्यान