ग्रंथसार
गुरुदेव, जिस प्रकार अग्नि में आहुति देने से यज्ञ पूर्ण होता है, क्या उसी प्रकार जीवन के अनुत्तरित प्रश्नों की आहुति देने से ज्ञान का मार्ग प्रशस्त होता है?
आदिपर्व · अध्याय 180
पराशर का राक्षस-सत्र और पुरोहित का महत्त्व