ग्रंथसार
नयी आशा के उदय और सत्य के उद्घाटित होने की वह पावन वेला, जब पांचाल नरेश का संशय विलीन हो गया और पांडवों का वास्तविक तेज आलोकित हुआ।
आदिपर्व · अध्याय 190
पांडवों के यथार्थ स्वरूप का प्रकटीकरण