ग्रंथसार
अंधकार की उस कुटिलता को जानकर आज भी मन विचलित हो उठता है, जिसने कालान्तर में कुरुक्षेत्र की उस धर्मविजय की नींव रखी थी।
आदिपर्व · अध्याय 195
दुर्योधन के कुटिल प्रस्ताव