ग्रंथसार
नयमिषारण्य के पावन तट पर ज्ञान की गंगा बह रही थी, जहाँ सूतजी के मुख से निकले हर शब्द में महाभारत का संपूर्ण वैभव समाया हुआ था।
आदिपर्व · अध्याय 2
पर्व-संग्रह और अक्षौहिणी सेना का स्वरूप