ग्रंथसार
अहंकार की अग्नि में जब भाई का प्रेम जलने लगता है, तब विनाश की आहट स्वयं द्वार पर आ खड़ी होती है।
आदिपर्व · अध्याय 200
सुन्द और उपसुन्द की तपस्या