ग्रंथसार
क्या एक स्त्री का प्रेम भाइयों के अटूट स्नेह को तोड़ सकता है? आइए, देवर्षि नारद के उस गंभीर उपदेश और सुन्द-उपसुन्द की विस्मयकारी कथा को सूतजी के मुख से सुनते हैं।
आदिपर्व · अध्याय 205
नारद जी का आगमन और सुन्द-उपसुन्द की कथा का आरम्भ