ग्रंथसार
खाण्डववन के अग्निकांड की वह मर्मस्पर्शी गाथा सुनकर देवरात का मन करुणा से भर उठा।
आदिपर्व · अध्याय 221
वन-प्राणियों की व्याकुलता और संहार