ग्रंथसार
मृत्यु के मुख में खड़ी एक असहाय माता और उसके नन्हें शिशुओं का वह संवाद, जो ममत्व और धर्म के अनसुलझे रहस्यों को खोल देता है।
आदिपर्व · अध्याय 230
जरीता का विलाप और नन्हे पक्षियों का संकट