ग्रंथसार
मृत्यु के मुख में खड़े उन नन्हे पक्षियों की वाणी ने प्रलयकारी अग्नि को भी शांत कर दिया, आइए जानें उस दिव्य कथा को।
आदिपर्व · अध्याय 233
नन्हे पक्षियों द्वारा अग्निदेव की स्तुति