ग्रंथसार
क्या पिता का स्नेह केवल उपस्थिति तक सीमित है, या वह अदृश्य प्रार्थनाओं में भी जीवित रहता है?
आदिपर्व · अध्याय 235
मन्दपाल का परिवार से मिलन