ग्रंथसार
नयमिषारण्य की पावन संध्या में जब धधकती अग्नि शांत होती है, तब क्या शेष बचता है—अहंकार या केवल एक दिव्य मित्रता का सूत्र?
आदिपर्व · अध्याय 236
खाण्डव दाह का समापन और आदिपर्व की पूर्णता