ग्रंथसार
अमृत की प्राप्ति का मार्ग कठिन है, किंतु साहस और विवेक की अग्नि में तो स्वयं काल भी विलीन हो जाता है।
आदिपर्व · अध्याय 28
प्रज्वलित अग्नि का शमन और सूक्ष्म रूप धारण