ग्रंथसार
इतिहास की उन कड़ियों में छिपा है एक ऐसा सत्य, जिसे जानकर ही मनुष्य अपने कर्मों के परिणामों की गम्भीरता को समझ पाता है।
आदिपर्व · अध्याय 47
जनमेजय का मंत्रियों से प्रश्न