ग्रंथसार
महाराज जनमेजय के प्रतिशोध की वह अग्नि क्या मात्र तक्षक का विनाश थी, या अधर्म के विरुद्ध एक भीषण हुंकार?
आदिपर्व · अध्याय 51
जनमेजय का प्रतिशोध का संकल्प