ग्रंथसार
गुरुदेव, सर्प-सत्र जैसे महायज्ञ का आयोजन तो न्याय के लिए था, फिर उसमें विघ्न की आशंका क्यों उत्पन्न हुई?
आदिपर्व · अध्याय 52
सर्प-सत्र की तैयारी और अपशकुन