ग्रंथसार
नैमिषारण्य के पावन तपोवन में, जहाँ समय भी ऋषियों की तपस्या को नमन करने रुक जाता है, वहाँ आज भृगुवंश की गौरवशाली गाथा का पावन पाठ हो रहा है।
आदिपर्व · अध्याय 7
भृगुवंश का प्रसंग और च्यवन की उत्पत्ति