ग्रंथसार
त्याग की पराकाष्ठा का वह अलौकिक दृश्य आज भी हमारे अंतर्मन को झकझोर देता है, जहाँ पुण्यों के दान से स्वर्ग का द्वार नहीं, बल्कि हृदय का द्वार खुल गया।
आदिपर्व · अध्याय 89
चार राजाओं द्वारा पुण्य-दान