ग्रंथसार
गंगा के शीतल तट पर बैठे सूतजी के मुख से जब पुरु वंश के यश का गान सुनाई दिया, तो तपोवन की वायु भी जैसे इतिहास की गूँज से पुलकित हो उठी।
आदिपर्व · अध्याय 95
पुरु वंश का विस्तृत वर्णन