ग्रंथसार
गंगापुत्र पितामह भीष्म के पराक्रम और राजकुमारी अम्बा के निश्छल प्रेम का वह मर्मस्पर्शी प्रसंग आज भी धर्म की सूक्ष्म सीमाओं को परिभाषित करता है।
आदिपर्व · अध्याय 98
शाल्व का पराभव और अम्बा का निवेदन