ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल शांत हो चुकी थी, किंतु विजय के शोर में छिपे हुए उस मौन को सुनने के लिए सूतजी के मुख से निकले शब्दों की प्रतीक्षा में शिष्य देवरात बैठा था।
अनुशासनपर्व · अध्याय 1
युधिष्ठिर का शोक और कुरुक्षेत्र आगमन