ग्रंथसार
नयमिषारण्य की शांत कुटी में, जहाँ समय की धारा ऋषियों के ज्ञान से धुलती है, आज वहाँ दान के सर्वोच्च सोपान—भूमिदान की महिमा गूँज रही है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 102
भूमिदान का माहात्म्य