ग्रंथसार
एक आश्रयहीन को छत प्रदान करना केवल ईंट-पत्थर का दान नहीं, बल्कि किसी के जीवन में धर्म और शांति का बीजारोपण करना है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 118
गृहदान का माहात्म्य