ग्रंथसार
तपस्या के पावन अग्नि में जलकर ही मनुष्य के व्यक्तित्व का स्वर्ण कुंदन समान निखरता है, आइए जानते हैं पितामह भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को दिया गया वह दुर्लभ उपदेश।
अनुशासनपर्व · अध्याय 125
तप का माहात्म्य