ग्रंथसार
अहिंसा केवल एक आचरण नहीं, अपितु संपूर्ण सृष्टि के प्रति प्रेम का साक्षात स्वरूप है, जिसे गुरु और शिष्य के संवाद में समझते हैं।
अनुशासनपर्व · अध्याय 13
अहिंसा का फल