ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्वलित हुआ, तब सूतजी ने दान के महात्म्य पर जो सूत्र खोले, उनसे देवरात का हृदय आलोकित हो उठा।
अनुशासनपर्व · अध्याय 131
शय्यादान का माहात्म्य