ग्रंथसार
क्या आप जानते हैं कि तृषित कंठ को जल पिलाना मात्र परोपकार नहीं, अपितु साक्षात मोक्ष का मार्ग है?
अनुशासनपर्व · अध्याय 134
जलदान का माहात्म्य