ग्रंथसार
अहिंसा केवल एक आचरण नहीं, अपितु आत्मा की वह निर्मल अवस्था है जहाँ द्वैत मिटकर केवल करुणा शेष रह जाती है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 146
अहिंसा का माहात्म्य