ग्रंथसार
सत्य के मार्ग पर चलने का साहस ही वह आधार है, जिस पर संपूर्ण सृष्टि का अस्तित्व टिका है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 15
सत्य और सत्यनिष्ठा का महत्त्व